
चलो हम आज रोते हैं,
तुम्हें फिर याद करते हैं ।।
सुबह का रूप है आगे ,
नरम सी धूप है जागे,
चलो अब गीत बोते हैं,
बात में बात नधते हैं,
सुखद हर बात ढोते हैं।
तुम्हें फिर याद करते हैं।।
वही नदिया किनारा है,
वही पानी की धारा है,
वही पर्वत उठे से हैं,
वही बादल झुके से हैं,
वही चातक बुलाते हैं ।
तुम्हें फिर याद करते हैं।।
इधर है फूल मुस्काए,
उधर बहकी हवा जाए,
हिले जो पात है पीपल,
सुनी जो बात है शीतल,
बसन्ती धुन सिहरते हैं।
तुम्हें फिर याद करते हैं ।।
दूर वंशी बजी है अब,
गगन खिड़की खुली है अब,
उड़े हैं पात बगुलों के ,
घिर गये गात धनुओं के,
तुम्हारे स्वप्न सेते हैं ।
तुम्हें फिर याद करते हैं।।