– इंद्रदेव त्रिवेदी
कम वोटों के इस तिलिस्म से, वोटर उबर नहीं पाये।
बहुत कहा लिख- लिखकर हमने, लेकिन सुधर नहीं पाये।।
सभी जानते छुट्टी होती, जिस दिन वोट पड़ा करते।
घोषित होता वोट डाल दो, ऐसा सभी कहा करते।।
आलस के बिस्तर से वोटर, फिर भी उतर नहीं पाये।।
बहुत कहा लिख- लिखकर हमने…….
पांचों चरणों के चुनाव में, शतप्रतिशत ना वोट पड़ा।
पंचों की बातें सिर माथे, पर पतनाला वहीं गिरा।।
बूथों के बस आसपास कुछ, वोटर गुजर नहीं पाये।।
बहुत कहा लिख- लिखकर हमने…….
बात करो तो लाख बहाने, वोटर अभी गिना देंगे।
वोट नहीं डाला क्यों पूछो, बातें नयी बता देंगे।।
सुस्ती के भंवरों में डूबे, वोटर उभर नहीं पाये।।
बहुत कहा लिख- लिखकर हमने…….