तेरे मोहल्ले में मेरा आना जाना आज भी है पर तेरी गली से दूर रहता हूँ।
दिल कहता है चल महबूब की गली में पर तेरी ही कसम से मजबूर रहता हूँ।।
©® डॉ सुलक्षणा अहलावत
तेरे मोहल्ले में मेरा आना जाना आज भी है पर तेरी गली से दूर रहता हूँ।
दिल कहता है चल महबूब की गली में पर तेरी ही कसम से मजबूर रहता हूँ।।
©® डॉ सुलक्षणा अहलावत