राम-विरोधी नित्य न‌ए शर-“डाॅ०अनिल गहलौत”

राम-विरोधी नित्य न‌ए शर, चुन-चुनकर संधाने!
राम-नाम अनमोल रतन है, मूढ़ भला क्या जाने??

जिस पर कृपा राम की है बस, वही उन्हें पहचाने।
जाने जिसने राम धन्य वह, जीवन अपना माने??

रामभक्ति की डोर बँधे सब, देख दुष्ट विचलित हैं।
फूट डालने जातिवाद की मदिरा लगे पिलाने।।

सत्तर वर्षों बाद भरा अब, घड़ा पाप का फूटा।
पस्त हो ग‌ए चित्त पड़े हैं, देखो चारों खाने।

“हैं आराध्य राम तो सबके”, कहने लगे नराधम।
“राम काल्पनिक” कहने वाले, लगे ‘राम’ मिमियाने।।
डाॅ०अनिल गहलौत

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