होली-“रजनी प्रभा”

नैनों की पिचकारी हो,और प्रीत का हो रंगअरमानों की होली खेलूं,फागुन में पिया के संग। गोरे_गोरे गाल पे…

हसरत-“रजनी प्रभा”

है हसरत मैं खेलूं होली कभीहो गुलाल तेरे और गाल मेरे। सबसे छुप_छुप कर आया करनातुम घर बालम…

मै नारी-“चंद्रकला भरतिया”

मैं नारी।जन्मदात्री सकल मानव जन की।कोमल हृदय ममतामयी,बच्चों का लालन-पालन करती।सुसंस्कारों से उन्हें सजाती।शिक्षा दे सुजान बनाती।। ब्रह्मा…