अजमल राज घराव में, रामदेव जी अवतार।
दलित, दरिद्र, दुखी बचाव्या, धरम राख्यो आधार।। 
बालक बन गोधन चराव्या, धर्यो भक्त पगचार।
गरीब अंधा लूला ने, दियो सुख अपार।।
सगला ने पर्चो दियो, प्रेम बंधण गाढ़।
जाति-पांति री दीवार तोड़ी, सबणो दिल थार।।
पाँच पिरां री संगत में, कर्यो धरम प्रचार।
भेदभाव मिटा डार्या, जप्यो राम साचार।।
लीलण घोड़ा साथ रे, निकळ्या वीर सवार।
रोगी, भूख्या, प्यासा ने, दियो जीवन सार।।
चमत्कार दिखलायो जग में, थरथरायो काल।
रामदेव जी नाम सूं, बंध्यो अमर मंगल।।
रुणिचा धर समाधि अमर, गूंजे चारों धाम।
रामापीर सरकार री, जय जय गूंजे नाम।।
मेला भरै रामदेवरा, धोक लगावै भीड़।
भक्तां री अरदास सूं, आज्यो जगमग पीर।।
स्वरचित एवं यथार्थ
मुकेश “कविवर केशव” सुरेश रूनवाल