प्राण’ नहीं बच पाएगा-“बृजेश आनन्द राय”

मौन, उपेक्षा और अनादर,जीवन भर तड़पाएगा ।प्रि्ये, तुम्हारे षडयंत्रों से'प्राण' नहीं बच पाएगा।। क्या ग्रन्थि है अविश्वास कीजिसमें…

हम सनातनी अनुपातक हैं-“बृजेश आनन्द राय, जौनपुर”

हम सनातनी अनुपालक हैं, राम सिया गुण गाएंँगे।राम-कथा को कहते-सुनते, निर्मल-मन हो जाएंँगे।। रामकथा सुखदाई जिसमें, मानस मोती…