Posted inArticles poetry उसकी अपनी परिभाषा-“राजेन्द्र ओझा” मैं जब,ये क्या गोद रहा है दीवार पर,कहता हूं,वो कहता है,नाना, गोद नही रहा हूं,चित्र बना रहा हूं,वो… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry वह झक्क सफेदी कहाँ गई-“डाॅ०अनिल गहलौत’ वह झक्क सफेदी कहाँ गई, अंतस् में कालापन क्यों है?मन था वसंत अब, है पतझड़, सूखा-सूखा सावन क्यों… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry धर्म का प्रभाव-“प्रतिभा पाण्डेय” लड़ना ही क्या समाधान है?धर्म को बचाने में ही सम्मान है । सच्चाई की जांति भूल गये हो… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles poetry लैंसडाउन की उॅचाइयों पर-“बृजेश आनन्द राय” लैंसडाउन की उॅचाइयों पर-टहलते हुए…'शीतकालीन ठंडी-तीव्र हवाओंऔर सख्त चट्टानों के बीचऊर्ध्व-वृक्षों की छाया तलेदोपहर से तिरछे पड़ते सूरज… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles poetry सर्व-दीपक जला हम उजाला किए-“बृजेश आनन्द राय” सर्व-दीपक जला हम उजाला किए, दूर होने लगी ये तिमिर, ये निशा। दीप की संस्कृति आज उज्ज्वल हुई,… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry चीर घोर कुहरे की चादर-“डाॅ०अनिल गहलौत” चीर घोर कुहरे की चादर, सूरज निकला है।फूल कमल के खिले आज फिर, मौसम बदला है।। धूल चाटते… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry हुआ धर्म का पुनरुद्धार-“डाॅ०अनिल गहलौत” हुआ धर्म का पुनरुद्धार।आई राम-भक्त सरकार।। अजब-गजब बल्ले की मार।गेंद "तीन सौ सत्तर"-पार।। खिले पुनः घाटी में फूल।कहीं… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry हम सबने कर दिया-“डाॅ० अनिल गहलौत💐” हम सबने कर दिया सूर्य को, तड़ी पार क्यों है?आज हुआ अपराध पूछना, अंधकार क्यों है?? कौन बताए… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry यह मत सोचो-“डाॅ० अनिल गहलौत” यह मत सोचो सूर्य हो गया, तड़ी पार क्यों है?है अपराध पूछना भी अब, अंधकार क्यों है?? कौन… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry फिर कभी-“डाॅ०अनिल गहलौत” फिर कभी आदर्श पाला, तो मुझे आपत्ति होगी।बुद्धि पर डाला न ताला, तो मुझे आपत्ति होगी।। मैं मनुज… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023