Posted inArticles poetry पुस्तक समीक्षा “सन्दूकची” कविता किसी भी युग का सांस्कृतिक दर्पण होती है। वह समाज की धड़कनों, जीवन की पीड़ाओं और भविष्य… Posted by Rajni Prabha October 15, 2025 Posted inArticles poetry संदूकची रजनी प्रभा जी की एक अनुपम काव्य कृति है। जिसमें रचयिता ने जीवन और जगत के विभिन्न पहलुओं… Posted by Rajni Prabha October 15, 2025 Posted inArticles ghazal Humanity सरसी छंद मात्रा -16-11 अंत-21 विषय- मधुकर मधुकर घूमे उपवन -उपवन ,सुंदर पाने रूप। मचल- मचल कर नर्तन करता, स्याह चंचल अनूप।। गुनगुन -गुनगुन गीत… Posted by Rajni Prabha October 14, 2025 Posted infamily Lifestyle राधे-राधे – आज का भगवद् चिन्तन 14 – 10 – 2025 || कर्म को धर्म बनायें || मंदिर में पूजा अवश्य करें लेकिन उसके साथ-साथ अपने प्रत्येक कर्म को भी पूजा बनाना अवश्य सीखिये। जीवन… Posted by Rajni Prabha October 14, 2025 Posted inArticles family festival शुभ सोमवार, आपका दिन मंगलमय हो । दिवाली ख़ुशियाँ और रोशनी का त्यौहार है , ख़रीदारी वहाँ से कीजिए जहाँ किसी का बन जाए त्यौहार… Posted by Rajni Prabha October 13, 2025 Posted inpoetry राधे – राधे – आज का भगवद् चिन्तन 13 – 10 – 2025 || मंगलमय अहोई अष्टमी || एक नारी के त्याग, समर्पण, सामर्थ्य और वात्सल्यता का प्रतीक अहोई अष्टमी व्रत नारी द्वारा अपनी संतति की… Posted by Rajni Prabha October 13, 2025
Posted inArticles poetry संदूकची रजनी प्रभा जी की एक अनुपम काव्य कृति है। जिसमें रचयिता ने जीवन और जगत के विभिन्न पहलुओं… Posted by Rajni Prabha October 15, 2025 Posted inArticles ghazal Humanity सरसी छंद मात्रा -16-11 अंत-21 विषय- मधुकर मधुकर घूमे उपवन -उपवन ,सुंदर पाने रूप। मचल- मचल कर नर्तन करता, स्याह चंचल अनूप।। गुनगुन -गुनगुन गीत… Posted by Rajni Prabha October 14, 2025 Posted infamily Lifestyle राधे-राधे – आज का भगवद् चिन्तन 14 – 10 – 2025 || कर्म को धर्म बनायें || मंदिर में पूजा अवश्य करें लेकिन उसके साथ-साथ अपने प्रत्येक कर्म को भी पूजा बनाना अवश्य सीखिये। जीवन… Posted by Rajni Prabha October 14, 2025 Posted inArticles family festival शुभ सोमवार, आपका दिन मंगलमय हो । दिवाली ख़ुशियाँ और रोशनी का त्यौहार है , ख़रीदारी वहाँ से कीजिए जहाँ किसी का बन जाए त्यौहार… Posted by Rajni Prabha October 13, 2025 Posted inpoetry राधे – राधे – आज का भगवद् चिन्तन 13 – 10 – 2025 || मंगलमय अहोई अष्टमी || एक नारी के त्याग, समर्पण, सामर्थ्य और वात्सल्यता का प्रतीक अहोई अष्टमी व्रत नारी द्वारा अपनी संतति की… Posted by Rajni Prabha October 13, 2025
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Posted inArticles ज़िन्दगी के रंग कई रे-“निरेन कुमार सचदेवा” किसी ने कहा , ज़िंदगी तस्वीर भी है , और तक़दीर भी ।फ़र्क़ तो रंगों का है ,… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles poetry कर उठी नृत्य-“डाॅ०अनिल गहलौत” कर उठी नृत्य कंचन-काया, सरसाया सोलहवाँ वसंत।।पलकों ने निज मदिरालय से, छलकाया सोलहवाँ वसंत।। कल तक तो थी… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry वो शब्द फीके हो गए-“अभिषेक मिश्रा” वो शब्द फीके हो गए जो गीत अधूरे यादों में..बीती बातें हो गई यारों क्या रखा उन बातों… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles poetry उसकी अपनी परिभाषा-“राजेन्द्र ओझा” मैं जब,ये क्या गोद रहा है दीवार पर,कहता हूं,वो कहता है,नाना, गोद नही रहा हूं,चित्र बना रहा हूं,वो… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry वह झक्क सफेदी कहाँ गई-“डाॅ०अनिल गहलौत’ वह झक्क सफेदी कहाँ गई, अंतस् में कालापन क्यों है?मन था वसंत अब, है पतझड़, सूखा-सूखा सावन क्यों… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inpoetry धर्म का प्रभाव-“प्रतिभा पाण्डेय” लड़ना ही क्या समाधान है?धर्म को बचाने में ही सम्मान है । सच्चाई की जांति भूल गये हो… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles प्राचीन संस्कृति का विरासत रामशिला-“सत्येन्द्र कुमार पाठक” विश्व की प्राचीन धरातल और विंध्य पर्वत माला का कीकट प्रदेश की राजधानी और बुध नंदन राजा गय… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles वैराग्य तंत्र के प्रणेता सारिपुत्र-“सत्येन्द्र कुमार पाठक” महायान सूत्रों का प्रणेता एवं हीनयान विद्यालयों का प्रतिरूप सारिपुत्र को शारिपुत्र ; सारिपुत्त , लिट कहा जाता… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles सर्वांगीण सुख समृध्दि का द्योतक कार्तिक पूर्णिमा-“सत्येन्द्र कुमार पाठक” सनातन धर्म में प्रत्येक वर्ष की 12 पूर्णिमाएं महत्वपूर्ण होती हैं। अधिकमास या मलमास की पूर्णिमा मिलने के… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023
Posted inArticles poetry लैंसडाउन की उॅचाइयों पर-“बृजेश आनन्द राय” लैंसडाउन की उॅचाइयों पर-टहलते हुए…'शीतकालीन ठंडी-तीव्र हवाओंऔर सख्त चट्टानों के बीचऊर्ध्व-वृक्षों की छाया तलेदोपहर से तिरछे पड़ते सूरज… Posted by Rajni Prabha December 13, 2023