Posted inpoetry में और मेरा बाबू ( मेरे पिता )-“कुलदीप सिंह रुहेला” खोलकर किताबो के पन्नो को में सो जाया करता थामेरा बाबू मुझको आकर रोज जगाया करता था जाता… Posted by Rajni Prabha October 27, 2023
Posted inpoetry मेरी माँ-“अविनाश कुमार चौधरी” मेरी पहली कविता "मेरी माँ" को सादर समर्पित।हमेशा मेरे घर आने का इंतजार करती मेरी माँ!जब भी घर… Posted by Rajni Prabha October 27, 2023
Posted inpoetry अब वो दिन दूर नहीं-“डॉ सुलक्षणा अहलावत” खुश हो लिए तुम तीन बार तलाक कह कर,पता है मन भर गया है तुम्हारा साथ रह कर।… Posted by Rajni Prabha October 27, 2023
Posted inpoetry बेशर्मी-“डॉ सुलक्षणा” किसै कै शर्म लिहाज रही कोण्या, दुनिया म्ह इसे इज्जतदार घणे होगे। बेशर्मी का ओड़ रहा ना, छोटे… Posted by Rajni Prabha October 27, 2023
Posted inpoetry कश्मकश-“सत्येन्द्र कुमार पाठक’ किसी ने लिखे ये मार्मिक ,दिल को छूने वाले कुछ शब्द , क्या ज़रूरत थी मुझे दो घरों… Posted by Rajni Prabha October 27, 2023
Posted inpoetry प्यार:एक जुनून नहीं ,एक पागलपन नहीं तो और क्या है तस्वीर बनाकर तेरी आसमाँ पर टाँग आया हूँ मेरी जान , और लोग सोच रहें हैं आज चाँद… Posted by Rajni Prabha October 21, 2023
Posted inpoetry नदी के किनारे-“राजीव कुमार झा” नवरात्र के साथखुशियों को समेटेघर से निकलकरबाजार मेंफूलों गुलदस्तों कीदुकानों परअक्सर नजर आतीकभी दरवाजे परकिसी बच्चे कोगोद में… Posted by Rajni Prabha October 21, 2023
Posted inpoetry अनन्य भाव से माँ शारदे को अनंत नमन और धन्यवाद-“विकास अग्रवाल बिंदल” दोहा छंद नवरात्रि लो नवरात्रें आ गये , व्रत वाला त्यौहार ।उत्सव देवी मातृ का , सजता है… Posted by Rajni Prabha October 21, 2023
Posted inpoetry आखिर क्यूं आखिर क्यू-“कुलदीप सिंह रुहेला” लेखक के मन की वेदना शब्द शब्द की कल्पनाकरके थक कर में चूर हुआकोई पढ़ने को भी नहीपढ़ता… Posted by Rajni Prabha October 18, 2023
Posted inpoetry पिता-“अनुभव छाजेड़” पिता एक मुकम्मल जहां है,जिसके बिना घर का हर कोना तनहा है,पिता से है घर में रौनक ,पिता… Posted by Rajni Prabha October 18, 2023