आंखें-“प्रतिभा जैन”

ये आंखें तुमसे प्यार कर बैठी,न जाने क्यों गंगा बना बैठी।बिना जाने ही तुम पर,एतबार कर बैठी।तुमने मुड…

भाई-“प्रतिभा जैन”

बरसों बाद खुशियों का दीदार हुआ,फिर भी मुसीबतों का ढेर नहीं हुआ।खुदा से शिकायत क्या करूं,अपनो का साथ…

एक दृष्टि-“बृजेंद्र।”

सुख शांति समृद्धि चाहिएतो सुदृढ़ करो ताना बाना।हो पड़ोसी हितकर अपनाबजता बहीं आनन्द तराना।। भारत इस सुविधा से…

पिता-“डॉ़ . कुसुमलता”

पिता वह वटवृक्षजो सदा खड़े रहकरछाया प्रदान करते ।पिता बहते पानी की नदीजिसके जल सेपरिवारजन होते तृप्त ।पिता…