Posted inArticles Events poetry ब्रह्मांड की सृष्टिकर्ता अष्टभुजी माता कुष्मांडा__ “सत्येन्द्र कुमार पाठक” ब्रह्मांड की सृष्टिकर्ता अष्टभुजी माता कुष्मांडासत्येन्द्र कुमार पाठकसनातन धर्म का शाक्त सम्प्रदाय के विभिन्न ग्रंथों में नवरात्र व… Posted by Rajni Prabha May 2, 2024
Posted inEvents ghazal poetry शीर्षक——-बेटी एक वरदान है___ “कवि———निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक——-बेटी एक वरदान है——- वो अपने बाप की इकलौती बेटी थी, और तेरे बाप ने दिया ही क्या… Posted by Rajni Prabha May 1, 2024
Posted inArticles poetry साकारात्मक ऊर्जा का द्योतक माता चन्द्रघंटा___ “सत्येन्द्र कुमार पाठक” साकारात्मक ऊर्जा का द्योतक माता चन्द्रघंटासत्येन्द्र कुमार पाठकसनातन धर्म का शाक्त सम्प्रदाय के ग्रंथों में नवरात्र उपासना की… Posted by Rajni Prabha May 1, 2024
Posted inghazal poetry shayari समझवला के बात रहे___ “अनिरुद्ध कुमार सिंह” समझवला के बात रहे का समझीं आ ना समझीं।बाउर आ नीमन समझीं।फरके या जाके समझी।केहू के बोला समझीं।… Posted by Rajni Prabha May 1, 2024
Posted inghazal poetry shayari भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय हो…… भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय हो……नई पहल से शुभारंभ हो ,कठिन जिंदगी सरल सहज हो ,भारतीय नववर्ष शुभ मंगलमय… Posted by Rajni Prabha May 1, 2024
Posted inArticles Events ghazal सनातन धर्म की शाक्त सम्प्रदाय के विभिन्न ग्रंथों के अनुसार____”सत्येन्द्र कुमार पाठक” ज्ञान और समृद्धि की माता ब्रह्मचारिणीसत्येन्द्र कुमार पाठकसनातन धर्म की शाक्त सम्प्रदाय के विभिन्न ग्रंथों के अनुसार माता… Posted by Rajni Prabha April 30, 2024
Posted inpoetry shayari शीर्षक:-मन तो मन है।__ “प्रतिभा पाण्डेय “प्रति” मन प्रीत भी हैमन मीत भी हैमन गीत भी हैमन रीत भी हैमन राह भी हैमन चाह भी… Posted by Rajni Prabha April 30, 2024
Posted inEvents poetry Press Note …संत….मानता हूं वो ही संत, ज्ञान कौ न जामें अन्त, …संत….मानता हूं वो ही संत, ज्ञान कौ न जामें अन्त,मात्र भगवंत जिन्हें प्राण तेऊ प्यारौ है। छोड़ धन… Posted by Rajni Prabha April 30, 2024
Posted inpoetry Press Note Short Story मत सोच तू ऐं! नादान,__”श्रीमती उमेश नाग जयपुर राजस्थान” मतदान मत सोच तू ऐं! नादान,राष्ट्र के हित में काम कर।तू वोट कर तू फर्ज समझदेश के हित… Posted by Rajni Prabha April 30, 2024
Posted inghazal poetry shayari 🌹🌹अपनापन सा लगता है 🌹🌹”कवि सन्तोष पाण्डेय “सरित” गुरु जी” 🌹🌹अपनापन सा लगता है 🌹🌹 जब से मैंने देखा तुमको,अपनापन सा लगता है lरजनी सजनी सी लगती है,दिन… Posted by Rajni Prabha April 29, 2024