Posted inEvents ghazal poetry शीर्षक——इश्क़ पागलपन नहीं तो और क्या है——-? शीर्षक——इश्क़ पागलपन नहीं तो और क्या है——-?? उसकी गली से गुज़रेगी मेरी मय्यत , फ़रिश्ते ये लालच दे… Posted by Rajni Prabha April 29, 2024
Posted inEvents ghazal poetry महुआं ने अंगराई ली, चहुं ओर बासंती बयार__ “रजनी प्रभा” हिंदू नववर्ष महुआं ने अंगराई ली, चहुं ओर बासंती बयारआम्र देख बौराए मन,किया धरती ने धानी श्रृंगार। सीमर… Posted by Rajni Prabha April 28, 2024
Posted inEvents ghazal poetry एक रूह है जिसको सुकून की तलब है__ “कवि——-निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक——-रूह महज़ सुकून चाहती है——— एक रूह है जिसको सुकून की तलब है……..एक मिज़ाज है जिसको जुनून की… Posted by Rajni Prabha April 28, 2024
Posted inghazal poetry shayari आसान क्या है ,मुश्किल क्या है ?__ “@आलोक सिंह ‘गुमशुदा'” आसान क्या है ,मुश्किल क्या है ? प्रेम या नफ़रत?सच या झूठ?ईमानदारी या बेईमानी? कई किरदार एक चेहरे… Posted by Rajni Prabha April 28, 2024
Posted inghazal poetry सुप्त सौन्दर्य की नींद__”बृजेश आनन्द राय,” सुप्त सौन्दर्यकी नींदऔरभावनाओं काउद्वेलनतन्द्रा कीबेपरवाहीऔरप्रतीक्षा काजागरणधैर्य-शक्ति कापरीक्षणऔरघुटन काअवलम्बनशून्यात्मक-अभिव्यक्तिऔरहृदय कातुमुलनादटीले कीरेतऔरसागर काशोरबहुत-कुछशान्तहो गयाहर एकज्वार काअन्त होगया'वह-मौसम' भी निश्चिन्त हो… Posted by Rajni Prabha April 28, 2024
Posted inEvents ghazal poetry यह मोह है__”बृजेश आनन्द राय” 'इन्द्रधन्वा-दैवीय-रूपाभाऔरनिर्दोष मुस्कानों की श्वेत-श्यामरिमझिमी-बारिशसंगमरमरी पत्थरों सासदाबहार-काल्पनिक-उठानी-यौवनऔरलम्ब-काया काझूमता सागौनहृदय-हीन भावना-रहितमूर्तियों का मोहऔर जन्म-जन्मांतर केसम्बन्धों का एक-मात्र संस्कार' …जिन्दगी जला… Posted by Rajni Prabha April 28, 2024
Posted inghazal poetry shayari मंजिल का सबको मिल पाना, इतना आसान नहीं होता ।__ “बृजेश आनन्द राय,” मंजिल का सबको मिल पाना, इतना आसान नहीं होता ।पहुँचे शिखरों पर भी टिकना, बिल्कुल आसान नहीं होता।।… Posted by Rajni Prabha April 22, 2024
Posted inghazal poetry shayari कौन रहा है तुम बिन प्यारा।__ “बृजेश आनन्द राय” कौन रहा है तुम बिन प्यारा।संग, सखा और हृदय दुलारा।।एक तुम्हीं हो मधुऋतु-जाई।फूल सरीखी सुखद सुहाई।। रूप सलोना… Posted by Rajni Prabha April 22, 2024
Posted inArticles ghazal poetry न जाओ,रुक जाओ!__ “बृजेश आनन्द राय,” न जाओ,रुक जाओ!तुम रुक गई तो'जीवन' यूँ ही नहीं बीत पाएगा…बल्कि, ये अपना एक-एक पलआत्मा द्वारा मन व… Posted by Rajni Prabha April 22, 2024
Posted inghazal poetry shayari आओ बच्चों, खेलें होली__ “बृजेश आनन्द राय,” कितनी सुन्दर अपनी टोली,आओ बच्चों, खेलें होली । पोपल-बाँस बनी पिचकारीरंग-रंग मारी बौछारीलल्लू, लल्लन, लल्ली, कारीसबकी-अपनी शोभा न्यारीपरबतिया… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024