Posted inghazal poetry shayari जो कंधे पर हाथ रखे और दिल हल्का हो जाए , उसे कहते हैं friend . “कवि——निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक——-मुझे अपने दोस्त बहुत अज़ीज़ हैं——— जो कंधे पर हाथ रखे और दिल हल्का हो जाए , उसे… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024
Posted inEvents poetry Press Note लाइफ की एकाउंट__ “हिमांशु पाठक हल्द्वानी नैनीताल उत्तराखंड” लाइफ की एकाउंट हिमांशु पाठककुछ शेष रही, कुछ खर्च हुई।लाईफ की केपिटल चेंज हुई।प्रोफिट एंड लोस एकाउंट देखा।ट्रेडिंग… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024
Posted inghazal poetry shayari धूप हमारे हिस्से की भी, हमें न मिली कभी।__”डा०अनिल गहलौत” धूप हमारे हिस्से की भी, हमें न मिली कभी।रही न अपने अधिकारों की क्यों बिलबिली कभी?? आगे बढ़कर… Posted by Rajni Prabha April 20, 2024
Posted inArticles poetry Short Story सनातन धर्म का नववर्ष है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा__”सत्येन्द्र कुमार पाठक” सनातन धर्म का नववर्ष है चैत्र शुक्ल प्रतिपदासत्येन्द्र कुमार पाठकचैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ होने वाला हिन्दू नववर्ष… Posted by Rajni Prabha April 18, 2024
Posted inArticles Events poetry अयोध्या में मिथिला की सितायन संस्कृति की छाप अयोध्या में मिथिला की सितायन संस्कृति की छापमुजफ्फरपुर। मिथिला की सितायन सांस्कृतिक की छाप और रामोत्सव के अवसर… Posted by Rajni Prabha April 18, 2024
Posted inghazal poetry shayari पंख बिन परवाज़ हर दिल प्यार से।पर रहे मोह्ताज भी इकरार से। एक ग़ज़ल लिखने का प्रयास। फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन२१२२-२१२२-२१२पंख बिन परवाज़ हर दिल प्यार से।पर रहे मोह्ताज भी इकरार… Posted by Rajni Prabha April 17, 2024
Posted inEvents ghazal poetry नारी जीवन की जननी है, यही तोशक्ति न्यारी है।__ ” शरीफ खान” नारी-शक्ति पर स्वनिर्मित रचना। नारी जीवन की जननी है, यही तोशक्ति न्यारी है।घोर विपत्ति,बाधाओं में भी,डर कर कभी… Posted by Rajni Prabha April 17, 2024
Posted inghazal poetry shayari जहाँ तक हो सके जुड़े रहना बुजुर्गों से… “निरेन कुमार सचदेवा।” शीर्षक——बुजुर्गों का ऐहतराम कीजिए ——— जहाँ तक हो सके जुड़े रहना बुजुर्गों से…….चट्टानों से जुड़े पत्थर टूटते हैं… Posted by Rajni Prabha April 17, 2024
Posted inghazal poetry shayari शीर्षक – हे जगत जननी , मात दुर्गे_ शीर्षक - हे जगत जननी , मात दुर्गे हे जगत जननी , मात दुर्गे ,निशदिन तुम्हें निहारूँ मां… Posted by Rajni Prabha April 16, 2024
Posted inEvents poetry Press Note ये भ्रष्ट कितने धृष्ट हैं, कानून का डर पी गए!__ “डॉ० अनिल गहलौत” ये भ्रष्ट कितने धृष्ट हैं, कानून का डर पी गए!कितने बड़े चिकने घड़े, पूरा समुंदर पी गए!! मोटी… Posted by Rajni Prabha April 13, 2024